Tuesday, September 4, 2007
मुसीबते...
एक ये मेरा चार्म है जो खत्म नही होता, और एक उसका हाम्र(फुल) एफ्फेकत है जो कम नही होता...
एक ये मेरी परेशानिया है जो खत्म नही होती, और एक ये उनकी निशानिया है जो कम नही होती...
एक ये मेरा कैरिएर है जो सेटल नही होता, और एक ये माँ-पा का टेंशन है जो कम नही होता...
एक मेरी लव-लाइफ है जो नही बस्ती, और एक ये उसे बसाने की मेरी कोशिशे है जो कम नही होती...
एक ये मेरी मित्र है जो नही मानती[नाराज़ है], और एक ये मैं हु जो उसे नही मनाती...
एक ये कमबख्त पदाई है जो खत्म नही होती, और एक ये मेरी और पड़ने की तमन्ना है जो कम नही होती...
एक ये आदते है जो छोड़ी नही जाती, और एक ये गिल्टी- कॉन्सिओउस मैं हु जो इनके बिना रह नही पाती...
एक ये फिल्मे है जो अच्ही बनाई नही जाती, और एक ये मेरी उम्मीदे हैं जो मुझे theatre है ले जाती...
आखिरी में... गौर फरमाँइऐगा...
एक ये नींद है जो नही है आती, और एक ये उसे पुरी करने की मेरी ख्वाहिश है की हमेशा मेरी क्लास्सेस है मिस हो जाती...
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1 comment:
"मुसीबतें" पढ़ कर आनद आगया बड़ी ही सीधी और सरल सब्दो मैं आपने बहुत कुछ कह दिया| कविताओ मैं मेरी समज बड़ी ही सीमित हैं अपर जब भी मैं आपकी कोई भी कविता पढता हु पता नही क्यों मेरा भी लिखने का दिल करने मन करता हैं| आपसे ऐसी कई और कविताये सुनने के इंतज़ार मैं...
कुशल
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